नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक चुनावी जनसभा के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता फिलहाल पश्चिम बंगाल है, लेकिन आगे उनका रुख दिल्ली की राजनीति की ओर भी होगा।
ममता बनर्जी के इस बयान को विपक्षी दलों ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे चुनावी बयानबाजी करार दिया है। उनके इस कथन के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि “लोकतांत्रिक अधिकारों और संघीय ढांचे की रक्षा” के लिए संघर्ष कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगी और राज्य अपने फैसले स्वयं लेगा।
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद भाजपा ने कड़ा पलटवार किया है। पार्टी नेताओं ने इसे चुनावी लाभ लेने की कोशिश बताया और कहा कि जनता मतदान के जरिए इसका जवाब देगी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान नजदीक है और पहले चरण में हुए मतदान के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रचार अभियान को और तेज कर दिया है। ममता बनर्जी के इस बयान ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।













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