नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबर के बाद पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा के साथ अन्य छह सांसदों ने भी आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और इसके बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी की संसदीय ताकत पर सीधा असर पड़ा है, खासकर राज्यसभा में पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है।
भगवंत मान का तीखा पलटवार
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन लोगों को जनता ने जनादेश और सम्मान दिया, उन्होंने विश्वासघात किया है। उन्होंने इसे “पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम” बताया और कहा कि जनता ऐसे फैसलों को कभी माफ नहीं करेगी।
आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने भी इन इस्तीफों को लेकर नाराजगी जताई है और इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम जनता के भरोसे के खिलाफ है और इसके पीछे बड़ी राजनीतिक रणनीति हो सकती है।
राजनीतिक माहौल गर्माया
इस बड़े घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में भी तनाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे आम आदमी पार्टी की आंतरिक कमजोरी बताया है, जबकि सत्ताधारी पार्टी इसे बाहरी दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप का परिणाम बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर सांसदों का एक साथ इस्तीफा देना आने वाले समय में आम आदमी पार्टी की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजरें आम आदमी पार्टी की अगली रणनीति पर टिकी हैं। पार्टी नेतृत्व इस टूट को रोकने और संगठन को मजबूत करने के लिए नए कदम उठा सकता है, लेकिन यह घटनाक्रम पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय तक असर डालने वाला माना जा रहा है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
