डेस्क : दक्षिण एशिया की कूटनीतिक हलचलों के बीच नेपाल से एक अहम राजनीतिक संदेश सामने आया है। अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर को अपने हालिया काठमांडू दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात का अवसर नहीं मिल सका। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय कूटनीति के बदलते समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सर्जियो गोर अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ नेपाल के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन शाह से शिष्टाचार भेंट का अनुरोध किया था, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इसे स्वीकार नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि बालेन शाह वर्तमान में देश के आंतरिक प्रशासनिक सुधारों, सुशासन और विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ऐसे में उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों से सीमित और चयनात्मक मुलाकातों का निर्णय लिया है।
हालांकि, इस दौरे के दौरान अमेरिकी दूत ने नेपाल के विदेश मंत्री, वित्त मंत्री तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग, निवेश संभावनाओं और व्यापार विस्तार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल प्रोटोकॉल का विषय नहीं है, बल्कि नेपाल की विदेश नीति में आ रहे बदलाव का भी संकेत हो सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, नेपाल अब बड़ी शक्तियों के साथ संबंधों में अधिक संतुलित और स्वतंत्र रुख अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले मालदीव में भी अमेरिकी दूत सर्जियो गोर को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात नहीं मिल सकी थी। ऐसे में लगातार दो देशों में शीर्ष स्तर की बैठक न हो पाना अमेरिका के क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
दक्षिण एशिया में छोटे देशों द्वारा बदलती विदेश नीति और बढ़ते आत्मनिर्भर रुख को विशेषज्ञ एक नए भू-राजनीतिक संतुलन की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।













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