डेस्क : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी की दिव्यांगता पेंशन से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह राशि दोनों अधिकारियों के वेतन से काटकर याचिकाकर्ता को दी जाए।
यह मामला सेवानिवृत्त मेजर राजदीप दिनकर पांडे से संबंधित है, जिन्होंने अपनी सेवा अवधि के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और कई सर्जरी का सामना किया था। याचिकाकर्ता का दावा था कि उनकी बीमारी सेवा से जुड़ी हुई है, इसलिए उन्हें दिव्यांगता पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए।
सेवा और बीमारी का विवाद
मेजर पांडे 2012 में सेना में शामिल हुए थे और प्रारंभिक वर्षों में पूरी तरह स्वस्थ थे। उनकी तैनाती ऊंचाई वाले और कठिन क्षेत्रों, जैसे लद्दाख में भी रही। सेवा के दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुईं, जिसके चलते उन्हें कई बार सर्जरी से गुजरना पड़ा।
मेडिकल बोर्ड ने उन्हें ‘लो मेडिकल कैटेगरी’ में रखा था, लेकिन बाद में उन्हें सेवा से रिलीव कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने दिव्यांगता पेंशन के लिए आवेदन किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
ट्रिब्यूनल से लेकर हाईकोर्ट तक मामला
पेंशन से इनकार किए जाने के बाद उन्होंने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल) का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता के अधिकारों से जुड़े स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए सेना प्रमुख और रक्षा सचिव पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया और आदेश दिया कि यह राशि उनके वेतन से वसूल कर याचिकाकर्ता को दी जाए।
फैसले का महत्व
यह फैसला रक्षा सेवाओं से जुड़े पेंशन मामलों में जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।













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