परामारिबो: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सूरीनाम के मारिएनबुर्ग स्थित ‘मॉन्यूमेंट फॉर द फॉलन हीरोज’ पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने गिरमिटिया श्रमिकों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका साहस और आत्मसम्मान आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
विदेश मंत्री ने वर्ष 1902 में मारिएनबुर्ग में हुए श्रमिक विद्रोह का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मूल के गिरमिटिया मजदूरों ने अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय समुदाय ने अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और सूरीनाम के संबंध केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों को साझा इतिहास, संस्कृति और भारतीय प्रवासी समुदाय के गहरे संबंध जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि गिरमिटिया समुदाय की विरासत आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती रहेगी।
विदेश मंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद भारतीय मूल के लोगों से भी मुलाकात की और भारत-सूरीनाम संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों कैरेबियाई देशों की अपनी आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा के दौरान वह सूरीनाम सहित कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, सांस्कृतिक सहयोग और प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।













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