डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान परमाणु समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर शीघ्र निर्णय नहीं करता, तो उसे गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “समझौता करो, नहीं तो बमबारी होगी।”
अमेरिकी माध्यमों की रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां तथा पश्चिम एशिया में उसकी बढ़ती सैन्य सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बनती जा रही हैं। इसी कारण अमेरिका लगातार कठोर रुख अपनाए हुए है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण को स्वीकार करे तथा अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए तैयार हो। इसके बदले कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी दबाव में किसी भी प्रकार की शर्त स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने संदेश में कहा कि यदि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ता है तो संघर्ष टाला जा सकता है, लेकिन यदि उसने अपना “हठ” जारी रखा तो अमेरिका और उसके सहयोगी “कठोर कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी सेना की अतिरिक्त तैनाती तथा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती हलचल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, व्यापार मार्गों तथा अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उधर, ईरान ने अमेरिकी बयानबाजी को “धमकी की राजनीति” करार देते हुए कहा है कि वह किसी भी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने पुनः दोहराया कि उसकी परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं तथा वह अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।













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