नई दिल्ली : खनिज अधिकारों पर कराधान से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 20 मई को सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका लंबित होने के कारण शीर्ष अदालत ने मामले की अगली तारीख निर्धारित की है। इस विवाद का संबंध राज्यों और केंद्र के बीच खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी शक्तियों से है।
बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस विषय पर दायर क्यूरेटिव याचिका अभी विचाराधीन है, इसलिए संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई फिलहाल टाली जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कुछ पक्षकारों ने केंद्र की मांग का समर्थन किया, जबकि कई राज्य सरकारों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया। राज्यों की ओर से कहा गया कि पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज की जा चुकी हैं और अब मामले में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यह विवाद कई वर्षों से लंबित है और कुछ अपीलें वर्ष 1999 से अदालत में विचाराधीन हैं।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति राज्यों के पास है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि संसद को संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 54 के तहत इस प्रकार का कर लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
इसके बाद केंद्र सरकार ने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। बाद में केंद्र ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल की, जिस पर अब सुनवाई लंबित है। इस मामले को राज्यों के राजस्व अधिकारों और संघीय ढांचे से जुड़े एक महत्वपूर्ण संवैधानिक विवाद के रूप में देखा जा रहा है।













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