नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से सात महत्वपूर्ण अपीलें की हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश को ऊर्जा बचत, स्वदेशी अपनाने और आर्थिक संयम की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, इसलिए नागरिकों को अभी से सतर्क और जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती पर विशेष जोर दिया।
पीएम मोदी की सात प्रमुख अपीलें
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से निम्नलिखित कदम अपनाने का आग्रह किया—
- जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें
- पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें
- मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें
- एक वर्ष तक सोने की खरीदारी टालें
- विदेशी यात्राओं को सीमित रखें
- स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें
- प्राकृतिक खेती और कम उर्वरक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ें
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन छोटे-छोटे प्रयासों से देश विदेशी मुद्रा बचाने और आर्थिक दबाव कम करने में सफल हो सकता है।
तेल संकट का भारत पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि सरकार एहतियात के तौर पर ईंधन बचत और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील केवल तात्कालिक संकट को लेकर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की दिशा में भी एक बड़ा संदेश है।













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