डेस्क : तमिलनाडु विधानसभा में सनातन धर्म को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सदन में दिए गए पुराने रुख को दोहराने के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
सदन में चर्चा के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उनका यह मानना पहले भी रहा है कि सनातन धर्म, उनके अनुसार, सामाजिक असमानता को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था है और इसलिए इसका अंत होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद विधानसभा में माहौल गर्म हो गया और विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विपक्षी दलों ने इस बयान को धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताते हुए सदन में आपत्ति जताई और कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, द्रमुक के समर्थक विधायकों ने इसे सामाजिक न्याय और समानता की विचारधारा से जुड़ा विषय बताया।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सीधे तौर पर इस विवाद पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन उन्होंने सदन में सभी सदस्यों से संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधानसभा विचार-विमर्श का मंच है और यहां सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
उदयनिधि स्टालिन पहले भी वर्ष 2023 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म को लेकर इसी तरह का बयान देकर विवादों में आ चुके हैं। उस समय भी उनके बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी बहस छिड़ गई थी।
ताजा घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर विचारधारा आधारित टकराव तेज हो गया है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रकार के बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल का तर्क है कि यह सामाजिक सुधार और समानता की बहस का हिस्सा है।
विधानसभा में उठा यह मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और अधिक गर्माहट पैदा कर सकता है, क्योंकि इस पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रिया लगातार सामने आ रही है।













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