डेस्क : केरल की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे लंबे मंथन के बीच कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता वी. डी. सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। पार्टी नेतृत्व के इस फैसले को कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा की चुनावी जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर कांग्रेस के भीतर गहन विचार-विमर्श जारी था। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने कई दौर की बैठकों के बाद आखिरकार वी. डी. सतीशन को राज्य की कमान सौंपने का निर्णय लिया। सतीशन वर्तमान में विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय रहे हैं और उन्हें संगठन तथा जनता के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों ने भी सतीशन के नाम का समर्थन किया था। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी की रणनीति तैयार करने और जनसमर्थन जुटाने में उनकी भूमिका को देखते हुए नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया।
वहीं, के. सी. वेणुगोपाल के समर्थकों को इस निर्णय से निराशा हुई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि केंद्रीय नेतृत्व वेणुगोपाल को राज्य की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है, लेकिन अंतिम समय में बाजी सतीशन के पक्ष में चली गई।
मुख्यमंत्री चयन को लेकर चली खींचतान के दौरान कांग्रेस के भीतर गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। कई स्थानों पर समर्थकों के बीच शक्ति प्रदर्शन और पोस्टरबाजी देखने को मिली थी। हालांकि पार्टी नेतृत्व अब इस फैसले के बाद संगठन को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वी. डी. सतीशन की नियुक्ति के जरिए कांग्रेस ने अनुभवी नेतृत्व और जनाधार के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार राज्य में किस तरह अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा तय करती है।













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