डेस्क : देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी की आशंका गहराने लगी है। पिछले 48 घंटों के भीतर सरकार और संबंधित संस्थानों की ओर से सामने आए तीन अहम संकेतों के बाद ईंधन महंगा होने की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों और रिपोर्टों के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में यह संकेत दिया है कि तेल विपणन कंपनियां लंबे समय तक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री जारी नहीं रख सकतीं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान को नीतिगत बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने भी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों को लेकर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
उधर, उद्योग जगत से जुड़े संगठनों ने भी सरकार से पेट्रोल और डीजल पर दी गई कर राहतों की समीक्षा करने की सिफारिश की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक करों में छूट बनाए रखना राजस्व पर दबाव डाल रहा है।
इसी बीच, हाल के दिनों में प्रधानमंत्री की ओर से जनता से ईंधन की बचत करने और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की अपील को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
वर्तमान स्थिति में सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में संशोधन संभव है।
फिलहाल आम जनता की नजरें ईंधन कीमतों को लेकर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।













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