डेस्क : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह के संस्थागत विकास को आगे बढ़ाने के लिए सदस्य देशों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के बीच ब्रिक्स की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, ऐसे में इसके ढांचे को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
विदेश मंत्री ने यह बात ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कही, जहां उन्होंने संगठन के विस्तार, उसकी बढ़ती जिम्मेदारियों और भविष्य की दिशा पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक विचार-विमर्श का एक प्रभावी मंच बन चुका है।
उन्होंने जानकारी दी कि भारत की अध्यक्षता के दौरान अब तक ब्रिक्स के तहत 80 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी रही है। इन बैठकों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई गति दी है और आपसी संवाद को और सशक्त बनाया है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि ब्रिक्स में शामिल नए सदस्य देशों को संगठन के मूल सिद्धांतों और साझा सहमति की भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए, ताकि निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और संतुलित बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स का भविष्य आपसी सहयोग, विश्वास और सामूहिक विकास पर निर्भर करता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान साझेदार देशों के साथ संवाद को लगातार बढ़ावा दिया है, जिससे समूह की पहुंच और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में ब्रिक्स को एक स्थिरता प्रदान करने वाली और रचनात्मक शक्ति के रूप में कार्य करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिक्स के विस्तार के साथ इसके संस्थागत ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता बढ़ गई है, ताकि यह संगठन वैश्विक दक्षिण की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सके।













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