जयपुर : अजमेर रोड स्थित टैगोर नगर में शनिवार को जैन मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” एवं मुनि श्री संभव कुमार जी का मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आत्मचिंतन का माहौल देखने को मिला।
मुनिद्वय का स्वागत सुश्रावक श्री शांतिलाल जी एवं श्रीमती ललिता जी सेठिया के नवोदय अणुव्रत भवन में आयोजित प्रवचन एवं स्वागत समारोह में किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और संतों के दर्शन एवं प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
प्रवचन के दौरान मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने आत्मचिंतन और आत्मसाक्षात्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य बाहरी जगत में मित्रों की खोज करता है, जबकि वास्तविक और सच्चा मित्र स्वयं उसका अपना आत्मस्वरूप ही है। उन्होंने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है, इसलिए उसे बाहरी संबंधों में ही सुख की खोज सीमित नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य मोबाइल और आधुनिक संसाधनों में इतना व्यस्त हो गया है कि वह स्वयं से संवाद का समय नहीं निकाल पा रहा है। यह केवल व्यस्तता नहीं, बल्कि अस्त-व्यस्तता की स्थिति है, जो व्यक्ति को आत्मबोध से दूर करती है।
मुनि श्री संभव कुमार जी ने अपने उद्बोधन में व्यवहार शुद्धि और पारिवारिक संबंधों की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार सबके प्रति प्रेमपूर्ण होना चाहिए, किंतु इसकी शुरुआत अपने घर और निकटजनों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग बाहर तो विनम्र रहते हैं, परंतु घर के भीतर व्यवहार कठोर हो जाता है, जो उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि उच्च और आदर्श व्यवहार की पहचान यही है कि जहाँ व्यक्ति रहे, वहाँ प्रेम और सद्भाव स्थापित करे तथा जहाँ से जाए वहाँ लोग उसे स्नेहपूर्वक याद करें।
इससे पूर्व मुनिद्वय प्रातः महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल, निर्माण नगर से विहार करते हुए टैगोर नगर पहुँचे। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया तथा सेवा का लाभ प्राप्त किया। विहार यात्रा के दौरान निर्माण नगर, श्याम नगर, कटैवा नगर, देवी नगर एवं विवेक विहार सहित अनेक क्षेत्रों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर के भक्ति गीतों के संगान एवं पद्मप्रभु स्तुति से हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने वंदन पाठ के माध्यम से मुनिद्वय का भावपूर्ण स्वागत किया। अंत में आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का शांतिपूर्ण समापन हुआ।













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