डेस्क : देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को लेकर तैयारियों की गति धीमी हो गई है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और पूंजी बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए आईपीओ की समयसीमा पर पुनर्विचार शुरू किया है।
सूत्रों के मुताबिक, मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े संघर्ष और लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका असर बड़े सार्वजनिक निर्गमों पर भी पड़ रहा है। निवेशकों की सतर्कता और फंड फ्लो में उतार-चढ़ाव को देखते हुए कंपनियां फिलहाल नई लिस्टिंग के निर्णय टाल रही हैं।
अभी क्या स्थिति है
रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो आईपीओ को लेकर प्रक्रिया पूरी तरह रोकी नहीं गई है, लेकिन इसमें धीमापन आ गया है। कंपनी अब आईपीओ के ढांचे, मूल्यांकन और सही समय को लेकर फिर से आकलन कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत के सबसे बड़े संभावित आईपीओ में से एक होगा, लेकिन इसके लिए स्थिर बाजार परिस्थितियां और मजबूत निवेशक भावना आवश्यक है।
पहले क्या था अनुमान
पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जियो का आईपीओ 2026 की पहली छमाही में बाजार में आ सकता है, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते इसमें बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
बाजार पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में केवल जियो ही नहीं, बल्कि कई बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग योजनाएं प्रभावित हुई हैं। बाजार में अस्थिरता के कारण कंपनियां फिलहाल “वेट एंड वॉच” की नीति अपना रही हैं।
संक्षेप में, जियो आईपीओ की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मौजूदा वैश्विक तनाव और बाजार की अनिश्चितता के चलते इसकी गति धीमी हो गई है और समयसीमा पर पुनर्विचार चल रहा है।













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