मुंबई: हिंदी फिल्म संगीत के 90 के दशक के सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायकों में शुमार कुमार सानू अपने करियर के उस दौर से भी गुज़रे हैं जब उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया था। एक समय ऐसा आया जब लगातार हिट गीत देने वाले इस गायक की फिल्मों में मांग अचानक कम होने लगी, जिससे उनका करियर कठिन मोड़ पर पहुंच गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी कठिन समय में कुमार सानू भावुक हो गए थे और संगीतकार अनु मलिक के सामने अपने संघर्ष को व्यक्त करते हुए रो पड़े थे। उन्होंने उस दौर में काम न मिलने की पीड़ा और मानसिक दबाव को खुलकर साझा किया था।
90 के दशक में कुमार सानू का नाम हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग से जुड़ा रहा है। उन्होंने “आशिकी”, “साजन”, “दीवाना” और “बाज़ीगर” जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज़ दी, जिससे वे उस दौर के सबसे प्रमुख और व्यस्त गायकों में शामिल रहे। वे लगातार कई वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक के फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित होते रहे।
हालांकि समय के साथ फिल्मी संगीत की शैली बदली और नए गायकों के उभरने से उनकी फिल्मों में सक्रियता कम हो गई। इसके चलते एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें नियमित रूप से काम मिलना मुश्किल हो गया।
इसी बीच उनकी वापसी का एक महत्वपूर्ण मोड़ 2015 में आया, जब फिल्म “दम लगा के हईशा” का गीत “दर्द करारा” लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गीत ने उन्हें एक बार फिर संगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिलाई और उनके करियर में नई ऊर्जा का संचार किया।
कुमार सानू की आवाज़ आज भी हिंदी फिल्म संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही लोकप्रिय मानी जाती है, जितनी उनके सुनहरे दौर में थी, और उनके गाए गीत आज भी श्रोताओं की यादों में जीवंत हैं।













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