डेस्क : हिंदी सिनेमा के संगीत जगत से जुड़ा एक पुराना लेकिन बेहद भावुक किस्सा इन दिनों चर्चा में है, जिसमें महान संगीतकार आर. डी. बर्मन और मशहूर गीतकार समीर अनजान के बीच का एक संवाद सामने आया है।
यह घटना उस समय की बताई जाती है जब आर. डी. बर्मन अपने करियर के कठिन दौर से गुजर रहे थे। इंडस्ट्री में नए संगीतकारों के उभरने के बाद उन्हें काम मिलना कम हो गया था, और उनके पास पहले जैसी व्यस्तता नहीं रही थी।
इसी बीच उन्होंने गीतकार समीर अनजान को अपने घर बुलाया। बातचीत के दौरान उन्होंने एक प्रोड्यूसर का ज़िक्र किया, जिसने कहा था कि वह अपनी फिल्म तभी बनाएगा जब उसके गीत समीर लिखेंगे। यह सुनकर आर. डी. बर्मन भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं।
समीर अनजान ने बताया कि उस मुलाकात में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी समय, किसी भी शर्त पर काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए न समय की कोई सीमा है, न ही पारिश्रमिक की कोई शर्त—जो भी समय और जैसा भी काम मिलेगा, वह स्वीकार होगा।
यह सुनकर आर. डी. बर्मन बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने समीर को गले लगा लिया। उसी भावुक क्षण में उन्होंने कहा कि उन्होंने साबित कर दिया है कि वे अपने पिता ‘अनजान’ की विरासत और मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
यह किस्सा भारतीय फिल्म संगीत के उस दौर की झलक देता है, जब रचनात्मक दुनिया में रिश्तों, सम्मान और भावनाओं की अहमियत पैसों और शर्तों से कहीं ऊपर मानी जाती थी।













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