डेस्क : कर्नाटक कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व और सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और विधायक डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं ने यतींद्र को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग उठाई है, जिससे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर बहस शुरू हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच सत्ता संतुलन को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ती चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यतींद्र सिद्धारमैया संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और उन्हें भविष्य के नेतृत्व के रूप में तैयार किया जा सकता है। वहीं विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाना शुरू कर दिया है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा परिवारवाद की राजनीति का विरोध करने का दावा करती है, लेकिन कर्नाटक में वही पार्टी अब सत्ता को परिवार के भीतर सीमित रखने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस में अन्य वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की कमी हो गई है कि मुख्यमंत्री के बेटे को ही इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चा हो रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में किसी भी पद को लेकर अंतिम निर्णय आलाकमान लेता है और फिलहाल इस तरह की चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलें हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर समय-समय पर उठने वाली चर्चाएं आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से भी जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में यतींद्र सिद्धारमैया का नाम सामने आना केवल एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस मुद्दे ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में पार्टी आलाकमान की प्रतिक्रिया और राज्य नेतृत्व का रुख इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।













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