पटना : बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) सीट को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। AIMIM की ओर से MLC सीट की मांग ने महागठबंधन की रणनीति पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार AIMIM का कहना है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र में उसका मजबूत जनाधार है, ऐसे में उसे विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के साथ-साथ विधान परिषद में भी हिस्सेदारी उसकी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करेगी।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह मांग एक नई राजनीतिक चुनौती के रूप में देखी जा रही है। पार्टी नेतृत्व पहले ही महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग और सहयोगी दलों के संतुलन को लेकर जटिल स्थिति का सामना कर रहा है। ऐसे में AIMIM की सक्रिय दावेदारी ने समीकरण और अधिक पेचीदा कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा मामला केवल एक MLC सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की विपक्षी राजनीति में भविष्य के गठबंधन और रणनीतिक सहयोग की दिशा तय कर सकता है। AIMIM के समर्थन और सहयोग को लेकर पहले भी कई स्तरों पर बातचीत और अटकलें सामने आती रही हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि AIMIM के रुख से यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्य की राजनीति में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव को और विस्तार देना चाहती है, जबकि RJD के लिए यह तय करना कठिन हो सकता है कि सहयोगी संतुलन और राजनीतिक गणित के बीच किस तरह संतुलन साधा जाए।
फिलहाल दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक समझौता या घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे ने नई बहस को जन्म दे दिया है। सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि RJD नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में बिहार की विपक्षी राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।













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