डेस्क : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने शिक्षा और युवाओं को केंद्र में रखकर कई बड़े चुनावी वादे किए हैं। उनकी घोषणाओं को राज्य की राजनीति में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो प्रदेश में कक्षा 1 से 12वीं तक की शिक्षा पूरी तरह निशुल्क कर दी जाएगी। उन्होंने समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने का भी वादा किया, जिससे सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।
युवाओं और छात्रों को साधने के उद्देश्य से उन्होंने आर्थिक सहायता योजनाओं की भी घोषणा की। आजाद ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि युवाओं के लिए सम्मानजनक सहायता योजनाएं शुरू की जाएंगी। इसी क्रम में उन्होंने 750 रुपये मानदेय देने का वादा भी किया।
उच्च शिक्षा को लेकर भी उन्होंने कई अहम घोषणाएं कीं। उनके अनुसार इंजीनियरिंग और विधि (लॉ) की पढ़ाई निशुल्क कराई जाएगी, जबकि एमबीबीएस शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बताया।
चंद्रशेखर आजाद ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा और रोजगार आम परिवारों की पहुंच से लगातार दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शिक्षा को केवल सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय पर आधारित यह एजेंडा युवाओं, छात्रों तथा वंचित वर्गों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद की ये घोषणाएं प्रदेश की चुनावी बहस को नई दिशा दे सकती हैं और अन्य दलों पर भी शिक्षा एवं रोजगार के मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने का दबाव बढ़ा सकती हैं।












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