जयपुर : राजस्थान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में अवैध निर्माणों और संदिग्ध वित्तीय स्रोतों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण अभियान शुरू कर दिया है। यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में विशेष समितियां गठित की गई हैं, जिन्हें अवैध निर्माण, अतिक्रमण और उनकी फंडिंग के स्रोतों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इन समितियों में राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा इकाइयों के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह सर्वे 0 से 50 किलोमीटर तक के दायरे में चलाया जा रहा है। शुरुआती निर्देशों में यह सीमा 15 किलोमीटर तक थी, जिसे बाद में बढ़ाकर व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण के तहत 50 किलोमीटर कर दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल अवैध निर्माणों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों की भी जांच करना है, जिसमें संदिग्ध बैंक लेन-देन, विदेशी फंडिंग और जमीन उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शामिल है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सीमा के नजदीक अनियंत्रित निर्माण और अतिक्रमण सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसी कारण स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है, जिसमें पटवारी, पूर्व सैनिक और अन्य स्थानीय संसाधनों की मदद ली जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि सर्वे के प्रारंभिक निष्कर्ष आने के बाद राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।












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