डेस्क : पंजाब सरकार के हाल ही में पारित धर्मग्रंथों की बेअदबी रोकथाम संबंधी कानून को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत पंजाब विधानसभा के सभी सिख विधायकों को तलब कर उनसे इस कानून पर जवाब मांगा। साथ ही सरकार को कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक माह का समय भी दिया गया है।
अकाल तख्त में आयोजित बैठक के दौरान जत्थेदार ने कहा कि सिख पंथ की धार्मिक भावनाओं और मर्यादा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का कानून बनाते समय संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर धार्मिक संगठनों और सिख विद्वानों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सिख विधायक अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हुए। इस दौरान उनसे विवादित कानून के संबंध में स्पष्टीकरण लिया गया। अकाल तख्त ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार निर्धारित एक माह की अवधि में आपत्तिजनक प्रावधानों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन नहीं करती है, तो आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा ने हाल ही में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने के उद्देश्य से एक विधेयक पारित किया है। हालांकि कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर सिख संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने आशंका जताई है कि इससे भविष्य में धार्मिक मामलों में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी पृष्ठभूमि में अकाल तख्त ने सरकार से कानून की पुनर्समीक्षा करने का आग्रह किया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पंजाब सरकार एक महीने की निर्धारित अवधि के भीतर कानून में संशोधन करती है या अपने मौजूदा रुख पर कायम रहती है।













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