नई दिल्ली: दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग को और तेज करने की इच्छा जताई है। दक्षिण कोरिया के भारत में राजदूत ली सियोंग-हो ने सोमवार को कहा कि दोनों देश उभरती तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं देखते हैं, जो आने वाले समय में आर्थिक और रणनीतिक विकास के लिए बेहद अहम होंगे।
राजदूत ली ने कहा, “हम विशेष रूप से एआई सहयोग पर अधिक गंभीरता से काम कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी भारत इस दिशा में अधिक ध्यान दे रहा है। हमें लगता है कि इस क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।”
उन्होंने बताया कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो के बीच हालिया बातचीत में भी इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
यह सहयोग भारत–दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत आगे बढ़ रहा है, जिसे अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग की भारत यात्रा के दौरान औपचारिक रूप से मजबूत किया गया था।
इस साझेदारी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई नेतृत्व ने “इंडिया–कोरिया डिजिटल ब्रिज” की शुरुआत का स्वागत किया है, जिसका उद्देश्य एआई, डेटा गवर्नेंस और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देना है।
भारत ने अपने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की तेज़ प्रगति को रेखांकित करते हुए कोरियाई कंपनियों को निवेश और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया है। दोनों देशों ने एआई के क्षेत्र में संयुक्त शोध, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है।
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसमें भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एआई आधारित अन्वेषण, ई-कचरे और खदान अवशेषों से खनिज पुनर्प्राप्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल होगा।
यह साझेदारी सेमीकंडक्टर, बैटरी, दूरसंचार उपकरण, जहाज निर्माण, रक्षा निर्माण और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों तक भी विस्तारित होगी।
दक्षिण कोरिया के राजदूत ने कहा कि भारत अब कोरिया की विदेश और आर्थिक नीति में एक केंद्रीय स्थान रखता है।
उन्होंने कहा, “भारत के प्रति कोरिया के दृष्टिकोण में उसकी अहमियत को कम करके नहीं आंका जा सकता। यदि हमारी योजनाएँ सफल होती हैं, तो दोनों देश एक-दूसरे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बन जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि है और दक्षिण कोरिया इस दिशा में उसका सहयोगी बन सकता है।
राजदूत ने कहा कि दोनों देश नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करते हैं और वैश्विक अस्थिरता के बीच मिलकर काम करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया “स्वाभाविक और आदर्श साझेदार” हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक तनाव या नकारात्मक पृष्ठभूमि नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या, प्रतिभा और आईटी क्षमता तथा दक्षिण कोरिया की विनिर्माण विशेषज्ञता एक-दूसरे के लिए पूरक हैं, जो “मेक इन इंडिया” पहल को और मजबूत कर सकती है।













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