डेस्क : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार सुबह ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। करीब 30 मिनट तक चली इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव जमीन पर बैठकर शंकराचार्य से चर्चा करते नजर आए। दोनों के बीच गोसंरक्षण, राम मंदिर से जुड़े मुद्दों और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से बातचीत हुई।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य गोमाता के सम्मान और संरक्षण को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं तथा उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिलाने का मार्ग तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को मानने वाले और गोसेवा से जुड़े लोग वर्तमान परिस्थितियों से दुखी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता को महंगाई और परेशानियों के अलावा कुछ नहीं दिया है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के फैसले का उल्लेख करते हुए भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में चढ़ावे की चोरी महापाप मानी जाती है, लेकिन सरकार इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) केवल औपचारिकता निभा रहा है। अखिलेश ने मांग की कि मंदिर परिसर में कार्यरत सभी लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कई नेता उनसे संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल है। साथ ही विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रही है। मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार दौरा करने के बावजूद कथित चोरी का खुलासा नहीं हो सका।
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी राम मंदिर से जुड़े कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि कार्रवाई की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन वास्तविक और कठोर कार्रवाई तब होगी जब प्रदेश में नया मुख्यमंत्री आएगा। उन्होंने अपनी 81 दिवसीय ‘गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध’ यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेशभर में लोगों से संवाद के दौरान अधिकांश लोगों ने गाय को माता का दर्जा देने का समर्थन किया, जबकि सरकार उसे केवल एक पशु के रूप में देखती है।
उल्लेखनीय है कि पिछले चार महीनों में अखिलेश यादव और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों की मुलाकात मार्च में लखनऊ में हुई थी।













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