डेस्क: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर करीब 90 सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद क्षेत्रीय संघर्ष और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इन सटीक हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र तथा रणनीतिक कमांड नेटवर्क शामिल हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि 8 जुलाई को किए गए इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। CENTCOM ने हमलों से जुड़ा वीडियो भी जारी किया, जिसमें कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले और विस्फोट दिखाई दिए।
इससे पहले 7 जुलाई को अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 80 सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक नौकाओं को भी नष्ट किया गया था। अमेरिका ने दावा किया कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में की गई।
CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना सतर्क है और राष्ट्रपति के निर्देश पर आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संघर्ष विराम खत्म होने की घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। संघर्ष विराम टूटने के बाद संयुक्त राष्ट्र, पाकिस्तान और कतर समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं ताकि क्षेत्र में व्यापक युद्ध की स्थिति को टाला जा सके।
अमेरिकी हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी नए हमले का जवाब दिया जाएगा।
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि दबाव की नीति और वादाखिलाफी की कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका हमला करेगा तो उसे जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कहा कि इसका संचालन ईरान की शर्तों और निर्णयों के अनुसार होगा, किसी बाहरी दबाव में नहीं।
इस बीच ईरानी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास, कोनारक, चाबहार और किश द्वीप समेत कई तटीय और रणनीतिक इलाकों में जोरदार धमाकों की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चाबहार के कुछ हिस्सों में अमेरिकी हमलों के बाद बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने एक बार फिर मध्य-पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता खोलने के प्रयासों में जुटा हुआ है।













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