डेस्क : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए इंट्राडे (एक ही कारोबारी दिन के भीतर) उधारी की अनुमति दे दी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य म्यूचुअल फंड योजनाओं में अस्थायी नकदी असंतुलन (लिक्विडिटी मिसमैच) को दूर करना और निवेशकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
सेबी के अनुसार, कई बार निवेशकों के रिडेम्प्शन, प्रतिभूतियों के सेटलमेंट और अन्य लेनदेन के समय में अंतर होने से म्यूचुअल फंड योजनाओं के सामने कुछ घंटों के लिए नकदी की कमी की स्थिति पैदा हो जाती है। अब ऐसी परिस्थितियों में फंड हाउस उसी कारोबारी दिन के भीतर सीमित अवधि के लिए उधारी लेकर इस कमी को पूरा कर सकेंगे।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि यह उधारी केवल इंट्राडे जरूरतों के लिए होगी और कारोबारी दिन समाप्त होने से पहले इसका पूरा भुगतान करना अनिवार्य होगा। साथ ही, इस उधारी का खर्च संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) वहन करेगी, जिससे म्यूचुअल फंड निवेशकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से म्यूचुअल फंड योजनाओं का संचालन अधिक सुचारु होगा, भुगतान संबंधी देरी की संभावना कम होगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। यह कदम विशेष रूप से उन परिस्थितियों में फायदेमंद साबित होगा, जब बाजार में अस्थायी नकदी दबाव उत्पन्न हो जाता है।
सेबी का यह नया प्रावधान निर्धारित तिथि से लागू होगा और इसके लिए नियामक ने आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं।













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