डेस्क : अमेरिका के व्हाइट हाउस में शुक्रवार को दिवाली का त्योहार पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के कई प्रमुख उद्यमियों और भारतीय समुदाय की जानी-मानी हस्तियों के साथ दीपावली समारोह में हिस्सा लिया। ओवल ऑफिस में आयोजित इस कार्यक्रम का खास आकर्षण उस समय देखने को मिला, जब भारतीय टेक उद्यमी और GOQii के संस्थापक विशाल गोंडल ने राष्ट्रपति ट्रंप को हनुमान चालीसा की एक प्रति भेंट की।
विशाल गोंडल ने ट्रंप को भेंट की हनुमान चालीसा
विशाल गोंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस खास मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ओवल ऑफिस में दिवाली मनाना और उन्हें हनुमान चालीसा भेंट करना उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा करोड़ों लोगों के लिए साहस, भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। दीये जलाने के दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती और मजबूत होने तथा अंधकार पर प्रकाश की विजय की कामना भी की।
‘जुग-जुग जियो’ कहकर दिया भारतीय संस्कृति का संदेश
इस मौके पर विशाल गोंडल ने भारतीय परंपरा के लोकप्रिय आशीर्वाद ‘जुग-जुग जियो’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि यह किसी के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करने का पारंपरिक तरीका है।
गोंडल ने दुनिया भर के लोगों के लिए शांति, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। उनका यह संदेश भारतीय संस्कृति और परंपराओं की वैश्विक पहचान को भी दर्शाता है।
विकास खन्ना और रूबी ढाला भी समारोह में हुए शामिल
व्हाइट हाउस के इस दिवाली समारोह में भारतीय मूल की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां भी मौजूद रहीं। इनमें मशहूर मिशेलिन-स्टार शेफ विकास खन्ना और कनाडा की पूर्व सांसद रूबी ढाला प्रमुख रूप से शामिल थीं। सभी ने पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलित कर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
2003 में शुरू हुई थी व्हाइट हाउस में दिवाली मनाने की परंपरा
व्हाइट हाउस में दिवाली मनाने की परंपरा वर्ष 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में शुरू हुई थी। वर्ष 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइट हाउस में दीया जलाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। इसके बाद से अलग-अलग राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में यह परंपरा जारी रही है।
इस वर्ष का आयोजन भी भारतवंशियों की सांस्कृतिक पहचान और भारत-अमेरिका के आपसी संबंधों को दर्शाने वाला खास अवसर बना।













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