डेस्क : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ गया है। गुरुवार को रावलकोट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान हुई हिंसक झड़पों में कई नागरिकों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने 5 नवंबर को रावलकोट के उमर फारूक चौक के पास संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े प्रदर्शनकारियों के धरना स्थल को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हुआ। हालात बिगड़ने पर कथित तौर पर गोलीबारी भी हुई, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
घटनास्थल से सोशल मीडिया के जरिए संदेश जारी करते हुए स्थानीय इन्फ्लुएंसर अकील ने दावा किया कि सुरक्षा बलों की ओर से दो से तीन घंटे तक गोलीबारी की गई। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। वहीं, JAAC के कोर सदस्य सरदार अमान खान ने कार्रवाई की निंदा करते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर नागरिकों के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाया।
अमान खान ने दावा किया कि पिछले पांच महीनों से जारी आंदोलन के दौरान 117 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ड्रोन और प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बुनियादी सुविधाओं और राजनीतिक अधिकारों की मांग
JAAC का आंदोलन मुख्य रूप से सस्ती बिजली, रोजगार के अवसर, बेहतर जनसुविधाओं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्र को अधिक स्वायत्तता देने की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन का आरोप है कि लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।
मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने JAAC से जुड़े कम से कम 147 कार्यकर्ताओं को फोर्थ शेड्यूल में शामिल किए जाने और आतंकवाद विरोधी कानूनों के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं।
आयोग के मुताबिक, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारियों तथा मीडिया पर बढ़ते दबाव ने क्षेत्र में नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रावलकोट में हुई इस कार्रवाई के बाद पीओजेके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव ने क्षेत्र में मानवाधिकारों और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।













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