नई दिल्ली। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में यह कहा कि अगर उनकी सरकार तीसरे कार्यकाल के लिए चुन कर आती है तो वह भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देंगे। इससे भारत की आर्थिक विकास की संभावनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस भी शुरु हो गई है।
इस बीच गुरुवार को एसबीआइ की शोध इकाई की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें दावा किया गया है कि भारत वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनोमी बनने की तरफ अग्रसर है।
एसबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जून, 2024 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 8 फीसद से ज्यादा रहने वाली है। इससे चालू वित्त वर्ष के दौरा सालाना विकास दर के 6.5 फीसद रहने की संभावना बन गई है। दुनिया में जहां अनिश्चितता बढ़ती जा रही है वहीं भारत के लिए 6.5 फीसद से 7 फीसद की विकास दर हासिल करना सामान्य हो चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद से भारत जिस आर्थिक विकास यात्रा पर है उसके हिसाब से यह वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। यह हर लिहाज से बात ही उल्लेखनीय उपलब्धि है। वर्ष 2023 से वर्ष 2027 के बीच भारत की इकोनोमी में आस्ट्रेलिया की इकोनोमी से ज्यादा की वृद्धि हो जाएगी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस दर से भारत की इकोनोमी में हर वर्ष 0.75 ट्रिलियन डॉसर (750 अरब डॉलर) की वृद्धि होगीऔर इस हिसाब से वर्ष 2047 तक भारत 20 ट्रिलियन डॉलर (01 ट्रिलियन डॉलर= एक लाख करोड़ डॉलर) की इकोनोमी बन जाएगा। एसबीआइ रिपोर्ट के मुताबिक देश के दो राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की इकोनोमी का आकार 500 अरब डॉलर से ज्यादा का हो जाएगा।
इन राज्यों की इकोनोमी का आकार वियतनाम, नार्वे जैसे एशियाई और यूरोपीय देशों से ज्यादा का हो जाएगा। रिपोर्ट ने आर्थिक संवृद्धि के इस दौर की वजह से वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत पहचान बनने की भी बात कही है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2027 तक अमेरिकी इकोनोमी का आकार 31.09 ट्रिलियन डॉलर का होगा और यह पहले स्थान पर होगी।
दूसरे स्थान पर चीन 25.72 ट्रिलियन डॉलर के साथ होगा। तीसरे स्थान पर भारत (5.15 ट्रिलियन डॉलर) का होगा। तीसरे स्थान पर होने के बावजूद चीन और भारत में काफी बड़ा अंतर होगा। दुनिया की इकोनोमी में चीन की हिस्सेदारी 20.2 फीसद की होगी जबकि भारत का हिस्सा चार फीसद होगा। जाहिर है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी भारत काफी पीछे होगा।
कई अर्थविद मानते हैं कि किसी भी देश में कितनी समृद्धि आई है इसका सही आकलन वहां प्रति व्यक्ति आय में दर्ज वृद्धि के आधार पर होनी चाहिए। एसबीआइ का यह आकलन आइएमएफ की तरफ से जुलाई, 2023 में ही जारी एक रिपोर्ट से काफी मिलती-जुलती है।













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