आगरा:एक शख्स की वर्ष 2009 में में मौत हो गई। 2021 में कागजों में फिर से इस व्यक्ति की मौत दिखाई गई। यानी ये शख्स 12 साल तक जिंदा रहा। विवाह भी रचा लिया। मुर्दा व्यक्ति फिर से कैसे जिंदा हो सकता है। एक मुर्दे का विवाह कैसे हो सकता है, लेकिन जालसाजों ने नगर निगमकर्मियों से सांठगांठ कर ये अजब-गजब कारनामा कर दिखाया। इसकी पोल तब खुली जब इस शख्स के बेटे ने आपके अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से अपने पिता की मौत से संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए सौंपे।
बोदला स्थित 10 हजार वर्ग गज जमीन में नया मोड़ सामने आया है। इस जमीन पर कब्जा करने के लिए रचे गए षड़यंत्र में एक किरदार उमा देवी का है। जिन्हें जसबीर सिंह की पत्नी बताया जा रहा है। जसबीर की मौत 22 दिसंबर 2009 में हुई थी। जिसका प्रमाणपत्र 26 दिसंबर 2009 को जारी किया गया। जालसाजों ने इन्हीं जसबीर सिंह की मौत अक्टूबर 2021 में दिखाकर एक नया मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा लिया। पता तब चला जब जसबीर के बेटे सतविंदर सिंह उर्फ माटी ने 2009 में अपने पिता की मौत होने का राजफाश किया।
आपके अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने सरदार टेहल सिंह की ही तरह जसबीर सिंह के बेटे माटी को भी खोज निकाला। वह दिल्ली में अपनी मां गुरमीत कौर और पत्नी के साथ रहते हैं। एक कोरियर कंपनी में काम कर रहे माटी ने बताया कि वह शास्त्रीपुरम स्थित निखिल उद्यान में रहते थे। यहीं पर उनके पिता की मौत हुई। उनकी एक दुकान आवास विकास कॉलोनी में भी थी। दुकान के ऊपर एक कमरा भी बना था। जब उनके पिता की मौत हुई तो वह 2010 में आगरा से दिल्ली चले गए थे। इस दौरान कहां क्या हुआ। उन्हें इसकी जानकारी नहीं हुई।
खबरों से षड़यंत्र की जानकारी मिली
माटी ने बताया कि सोशल मीडिया पर पड़ी हिन्दुस्तान की खबरों को पढ़ा। उन्हें जानकारी मिली कि उनके पिता के नाम पर कितना छल किया गया है। उनके पिता की तो मौत 2009 में ही हो गई थी। उसके बाद वह जिंदा कहां से हो गए। उन्होंने लुधियाना में रह रहे अपने फुफेरे भाई जगदेव सिंह को फोन किया। मामले की जानकारी दी।
अंत्येष्टि संबंधी सारे कागजात सौंपे
माटी ने अपने पिता जसबीर की मौत के बाद कागजातों को ‘हिन्दुस्तान’ से साझा किया है। 22 दिसंबर 2009 की श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी खालसा गली मृत्यु सूचना प्रपत्र संख्या 5498, श्री क्षेत्र बजाजा के क्रमांक संख्या 8337 का शव वाहन के लिए कटी रसीद, श्री क्षेत्र बजाजा का दाह संस्कार सामग्री व्यवस्था प्रपत्र क्रम संख्या 14944 और श्मशान सुधार समिति ताजगंज का क्रमांक संख्या 3586 का दाह संस्कार प्रमाण पत्र भी दिया है।













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