नई दिल्ली: भारत का मार्च मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 16 साल के हाई पर पहुंच गया है। उत्पादन और ऑर्डर अक्टूबर 2020 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। एक निजी सर्वेक्षण से पता चला है कि मार्च में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 2024 में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके पीछे की वजह यह है कि कंपनियों ने मजबूत प्रोडक्शन और नए ऑर्डर के जवाब में नियुक्तियां बढ़ा दीं।एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई फरवरी में 56.9 से बढ़कर मार्च में 16 साल के उच्चतम 59.1 पर पहुंच गया। जबकि, यह फरवरी 2008 के बाद से सबसे अधिक है।
पिछले महीने में भारत का मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट लगातार 33वें महीने बढ़ा है। यह उपभोक्ता, मध्यवर्ती और निवेश सामान क्षेत्रों में वृद्धि तेज होने के कारण हुआ है। फर्म ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “अक्टूबर 2020 के बाद से आउटपुट और नए ऑर्डर में सबसे मजबूत वृद्धि के कारण था। यह सर्वेक्षण के इतिहास में इनपुट इन्वेंट्री में दूसरे सबसे तेज उछाल के समानांतर था।”
कंपनियों का स्टॉक बढ़ाने पर फोकस
आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च में कंपनियों ने स्टॉक बढ़ाने पर फोकस रखा, क्योंकि उन्हें सेल में सुधार की उम्मीद थी। इनपुट खरीदारी और भंडारण में कैपिटल गुड्स सबसे उज्ज्वल क्षेत्र के रूप में उभरा।
कंपनियां कुछ चीजों को लेकर आशावादी
सर्वे से पता चला है कि भारतीय कंपनियां कुछ चीजों को लेकर आशावादी थीं, लेकिन समग्र भावना चार महीने के निचले स्तर पर आ गई। क्योंकि महंगाई की चिंता उनके आत्मविश्वास पर भारी पड़ रही थी। लागत का दबाव पांच महीनों में सबसे अधिक हो गया। कंपनियों ने कपास, लोहा, मशीनरी उपकरण, प्लास्टिक और स्टील के लिए अधिक कीमत चुकाई।
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री लैम ने कहा, “भारत का मार्च मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने मजबूत उत्पादन और नए ऑर्डर के जवाब में नियुक्तियों का विस्तार किया। हाई डिमांड और क्षमता में थोड़ी सख्ती के कारण, इनपुट लागत मुद्रास्फीति मार्च में बढ़ी।” इन्वेंट्री पर्चेज सर्वे के इतिहास में मई 2023 के बाद ‘दूसरी सबसे बड़ी सीमा’ तक पहुंच गई। जबकि, रोजगार सृजन की गति हल्की थी, इसके बावजूद यह सितंबर 2023 के बाद से सबसे अच्छी स्थिति है।













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