डेस्क : भारतीय मुद्रा रुपये ने सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.34 के स्तर तक पहुंच गया। हाल के दिनों में दबाव का सामना कर रहे रुपये को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से समर्थन मिला।
कारोबार के दौरान रुपया लगातार तीसरे सत्र में मजबूत हुआ और दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने और व्यवस्थित स्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हालिया गिरावट के बाद रुपया अपने वास्तविक मूल्य से कुछ कमजोर दिखाई दे रहा है।
इस बीच, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी रुपये के लिए राहत का कारण बनी है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों से तेल बाजार पर दबाव कम हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक प्रभाव भारतीय मुद्रा पर पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों तक पहुंच गया था। उस समय आरबीआई ने बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को सहारा दिया था। अब वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और केंद्रीय बैंक के सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय मुद्रा में मजबूती लौटती दिखाई दे रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। फिलहाल आरबीआई के सक्रिय रुख ने बाजार को भरोसा दिया है, जिससे रुपये को मजबूती मिली है।













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