डेस्क:ट्रंप टैरिफ के झटकों के बीच आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए गुड न्यूज है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP ग्रोथ) का अनुमान बढ़ा दिया है। फिच ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की विकास दर का पूर्वानुमान पहले के 6.5% से बढ़ाकर अब 6.9% कर दिया है। यह बदलाव मुख्य रूप से चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मिली मजबूत आर्थिक वृद्धि और घरेलू मांग में तेजी के कारण किया गया है। फिच के ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक-सितंबर’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में 7.4% की वृद्धि दर के मुकाबले अप्रैल-जून में विकास दर बढ़कर 7.8% हो गई, जो उनके जून में लगाए गए 6.7% के अनुमान से कहीं अधिक है।
भविष्य की संभावना
फिच का मानना है कि अगले दो वित्तीय वर्षों में विकास दर में थोड़ी मंदी आ सकती है। एजेंसी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए विकास दर 6.3% और उसके अगले वर्ष (FY28) के लिए 6.2% रहने का अनुमान लगाया है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से थोड़ा ऊपर चल रही है, इसलिए भविष्य में विकास दर में थोड़ी कमी की उम्मीद है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है
फिच रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है। पीएमआई सर्वे और जुलाई में औद्योगिक उत्पादन इसकी ओर इशारा करते हैं। सितंबर से लागू हुए जीएसटी सुधारों के चलते वित्तीय वर्ष 2026 में उपभोक्ता खर्च में मामूली वृद्धि की उम्मीद है।
व्यापारिक गतिविधियों का एक सूचक, समग्र पीएमआई सूचकांक, अगस्त में 17 वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि औद्योगिक उत्पादन चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी में कटौती के कारण विकास दर में कम से कम 10 आधार अंकों (बीपीएस) की बढ़ोतरी होगी।
फिच का अनुमान है कि भारत की विकास दर वित्तीय वर्ष 2027 में घटकर 6.3 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2028 में 6.2 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसने कहा कि घरेलू मांग मुख्य चालक बनी रहेगी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2026 की शुरुआत में मिलने वाली मजबूत गति वर्ष की दूसरी छमाही तक बनी रहे, ऐसा संभव नहीं लगता।
महंगाई पर क्या बोला फिच
जुलाई में मुद्रास्फीति घटकर 1.6% पर आ गई, जो 2017 के बाद से सबसे कम है। इसके पीछे कमजोर खाद्य कीमतें और पर्याप्त स्टॉक का होना है। मूल मुद्रास्फीति (कोर इन्फ्लेशन) भी 4% से नीचे आ गई। फिच का अनुमान है कि मुद्रास्फीति 2025 के अंत तक औसतन 3.2% और 2026 के अंत तक 4.1% रहेगी।
ब्याज दरों में एक और कटौती की उम्मीद
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2025 के अंत तक नीतिगत दरों (रिपो रेट) में 25 आधार अंकों की कटौती करने की उम्मीद है। यह दरें 2026 के अंत तक स्थिर बनी रहेंगी और उसके बाद 2027 में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है।
फिच ने अभी तक भारत की सॉवरेन रेटिंग (सरकारी क्रेडिट रेटिंग) में बढ़ोतरी नहीं की है। इसी साल की शुरुआत में, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मजबूत अर्थव्यवस्था और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन का हवाला देते हुए 18 साल के बाद भारत की रेटिंग बढ़ाई थी।













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