दुबई: ईरान के कई हिस्सों में बढ़ते आर्थिक विरोध-प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। जून में अमेरिकी हमलों के बाद यह तनाव और गहरा गया है, जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की “हिंसक हत्या” करता है तो अमेरिका “उन्हें बचाने के लिए आगे आएगा।” प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से ईरानी मुद्रा रियाल के तेज़ पतन के बाद शुरू हुए।
ट्रंप ने लिखा, “हम पूरी तरह तैयार हैं और कार्रवाई के लिए सतर्क हैं,” हालांकि उन्होंने इसका कोई विवरण नहीं दिया।
इसके तुरंत बाद ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिका और इज़रायल पर ईरान में अशांति फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। इससे पहले भी ईरान में हुए आंदोलनों के दौरान ऐसे आरोप लगाए जाते रहे हैं।
लारीजानी ने लिखा, “ईरान की आंतरिक समस्याओं में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता और अमेरिकी हितों के विनाश के समान होगा। अमेरिकी जनता को यह समझना चाहिए कि यह साहसिक अभियान ट्रंप ने शुरू किया है। उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए।”
उनका यह बयान मध्य पूर्व में अमेरिका की व्यापक सैन्य मौजूदगी की ओर संकेत माना जा रहा है। जून में ईरान ने कतर स्थित अल-उदीद एयरबेस पर हमला किया था, जो इज़रायल के साथ 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद किया गया था।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के सलाहकार और सुरक्षा परिषद के पूर्व सचिव अली शमखानी ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का कठोर जवाब दिया जाएगा।
शमखानी ने कहा, “जो भी हस्तक्षेपकारी हाथ ईरान की सुरक्षा के बहुत करीब आएगा, उसे काट दिया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि ईरानी जनता अमेरिका द्वारा ‘बचाए जाने’ के अनुभव को भली-भांति जानती है—चाहे वह इराक हो, अफ़ग़ानिस्तान या ग़ाज़ा।
वर्तमान प्रदर्शन छठे दिन में प्रवेश कर चुके हैं और 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं। 2022 में 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक आंदोलन हुए थे। हालांकि मौजूदा प्रदर्शन अभी पूरे देश में नहीं फैले हैं और न ही उतने तीव्र हैं।
सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के नेतृत्व वाली ईरानी नागरिक सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद का संकेत देने की कोशिश कर रही है। लेकिन पेज़ेश्कियान ने स्वीकार किया है कि मुद्रा संकट के चलते उनके पास सीमित विकल्प हैं। वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है, जिसने आर्थिक असंतोष को और भड़का दिया।
शुरुआत में आर्थिक मुद्दों से जुड़े इन प्रदर्शनों में अब ईरान की धार्मिक सत्ता के खिलाफ नारे भी सुनाई देने लगे हैं।
युद्ध के महीनों बाद ईरान ने यह भी कहा है कि वह देश में किसी भी स्थान पर यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, जिससे पश्चिमी देशों के साथ संभावित बातचीत का संकेत देने की कोशिश की गई है। हालांकि अब तक किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत नहीं हुई है। इस बीच ट्रंप और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार तेहरान को चेतावनी देते रहे हैं कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न करे।












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