नई दिल्ली : भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद किए जाने तक सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) निलंबित ही रहेगी। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया गया था और इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के जवाब में स्थगित की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि बहाल करने का कोई प्रश्न नहीं उठता।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी। इसी क्रम में सिंधु जल संधि को भी स्थगित करने का निर्णय लिया गया था।
जायसवाल ने पाकिस्तान द्वारा चिनाब और ब्यास नदियों पर भारत की जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के अनुरूप निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
तुर्किये के विदेश मंत्री की हालिया टिप्पणियों पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता सर्वोपरि है और विभिन्न देशों के साथ उसके संबंध अपने-अपने महत्व रखते हैं।
संधि के निलंबन का प्रभाव जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले स्थित बगलिहार बांध पर भी देखा जा रहा है, जहां बांध के द्वार लंबे समय से बंद रखे गए हैं। इसे क्षेत्र में भारत की जल प्रबंधन और जलविद्युत नीति में आए बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि से जुड़े कानूनी विवादों पर भी अपनी स्थिति दोहराई। भारत ने 15 मई 2026 को तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को अस्वीकार करते हुए उसे अवैध रूप से गठित संस्था का निर्णय बताया। भारत का कहना है कि उसने कभी इस न्यायालय को मान्यता नहीं दी और उसकी सभी कार्यवाहियों तथा निर्णयों को शून्य एवं अमान्य मानता है।
सिंधु जल संधि के निलंबन का दूसरा वर्ष शुरू होने के साथ ही भारत का रुख और अधिक स्पष्ट हो गया है। नई दिल्ली ने संकेत दिया है कि क्षेत्रीय स्थिरता, जल संसाधनों के प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों को अब आतंकवाद के मुद्दे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।












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