डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण जुलाई के मध्य तक लागू होने की संभावना है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को विशाखापत्तनम में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।
गोयल ने बताया कि दोनों देशों के व्यापार अधिकारी समझौते के प्रारंभिक चरण को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। इस समझौते के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इस महीने की 2 से 4 तारीख तक नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच व्यापक और सकारात्मक चर्चा हुई। अमेरिकी व्यापार विभाग के विभिन्न प्रभागों के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आया था, जिनसे उनकी भी मुलाकात हुई। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले महीने के मध्य तक समझौते के पहले चरण को लागू करने की स्थिति बन जाएगी।
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि समझौते के शेष मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए आने वाले सप्ताहों में उच्च स्तरीय वार्ताएं भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह द्विपक्षीय व्यापार समझौते का केवल पहला चरण है, जो भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में विशेष लाभ प्रदान करेगा। संभावना है कि इस माह के अंत तक अमेरिका का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा।
इससे पहले समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला को संबोधित करते हुए गोयल ने भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में भारत लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के मत्स्य एवं समुद्री उत्पादों का निर्यात करता था, जबकि 31 मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में वैश्विक मत्स्य व्यापार का आकार लगभग 150 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2024 तक बढ़कर 164 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इस अवधि में वैश्विक वृद्धि दर लगभग 10 प्रतिशत रही, जबकि भारत ने कहीं अधिक तेज गति से प्रगति की है। वर्ष 2022 और 2023 के दौरान वैश्विक व्यापार में अस्थायी उछाल देखने को मिला था, लेकिन दीर्घकालिक वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही।
गोयल ने कहा कि भारत की यह विकास यात्रा देश के समुद्री उत्पाद क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाती है और निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर उपलब्ध करा रही है।












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