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Home आराधना-साधना

ज्ञानवापी एएसआई सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 3 अगस्त को, तब तक सर्वेक्षण पर रोक

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
July 27, 2023
in आराधना-साधना, मुख्य समाचार
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समझें काशी विश्‍वनाथ Vs ज्ञानवापी मस्जिद का क्‍या है पूरा विवाद

प्रयागराज:वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। फैसला तीन अगस्त को सुनाया जाएगा। तब तक सर्वेक्षण पर रोक भी बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने लगातार दूसरे दिन मामले पर सुनवाई की। हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के वकीलों के साथ ही वाद दाखिल करने वाली महिलाओं के वकील भी मौजूद रहे। यूपी सरकार के महाधिवक्ता और एएसआई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल आलोक त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।

वाराणसी की अदालत ने 21 जुलाई को हिन्दू पक्ष की अर्जी पर ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। 24 जुलाई को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर 26 जुलाई तक रोक लगाते हुए मुस्लिम पक्ष को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट को मामले में 26 जुलाई तक फैसला सुनाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने खुद सुनवाई शुरू की। बुधवार को साढ़े चार घंटे सुनवाई के बाद मामले को गुरुवार के लिए टाल दिया था।

गुरुवार की दोपहर करीब सवा तीन बजे मामले की सुनवाई दोबारा शुरू हुई। सबसे पहले मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल किया। इसके बाद हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कोर्ट से कहा कि अगर इजाजत मिले तो कुछ फोटोग्राफ पेश करना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि लीगल आइडेंटिटी क्या है। एएसआई है? एएसआई के अफसर आलोक त्रिपाठी एएसआई के गठन और कार्य के बारे में बताया। बताया कि 1871 में मानुमेंट के संरक्षण के लिए एएसआई गठित की गई। 1951 में एएसआई को पुरातात्विक अवशेषों का बायोलॉजिकल संरक्षण करने की यूनेस्को की संस्तुति मिली। इसके साथ ही पुरातत्व अवशेष की मानीटरिंग भी करती है। कोर्ट ने पूछा कि डिगिंग भी करेंगे? इस पर त्रिपाठी ने कहा कि हम डिगिंग नहीं करने जा रहे।

वाद निस्तारण में देरी क्यों हो रही है
कोर्ट पहुंचे महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार की केवल कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है। हम आदेश का पालन कर रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट है, वह देख रहा, हम कानून लागू कर रहे हैं। वहां सुरक्षा में सीआईएसएफ और पीएसी तैनात हैं। हमारा रोल लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने का है। कोर्ट ने पूछा कि वाद निस्तारण में देरी क्यों हो रही है। इस पर जैन ने मुकदमे में कोर्ट कार्यवाही की जानकारी दी‌। कोर्ट ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं, अर्ली डिस्पोजल? जैन ने कहा कि जी माई लॉर्ड।

वाराणसी में 19 वाद दाखिल किए गए
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता फरमान नकवी ने कहा कि ग्राह्यता पर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लंबित है। हाईकोर्ट लोवर कोर्ट ने अस्वीकार किया है। 1991 में वाद दायर किया। फिर 2021 में दाखिल हुआ है। वाराणसी में 19 वाद दायर है। सिविल जज से जिला जज को केस सौपा गया। सभी वाद बाहरी लोगों ने दायर किया है।

इस पर वादिनी के वकील प्रभाष त्रिपाठी ने कहा कि फोटोग्राफ है, जिससे साफ है कि वहां मंदिर है। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है वादी को श्रंगार गौरी, हनुमान, गणेश की पूजा दर्शन का विधिक अधिकार है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आपकी बहस अलग लाइन में जा रही है। हम यहां एविडेंस नहीं तय कर रहे हैं। हम इस बात पर सुनवाई कर रहे हैं कि सर्वे होना चाहिए या नहीं और सर्वे क्यों जरूरी है। इस पर प्रभाष त्रिपाठी ने कहा कि वाद तय करने के लिए सर्वे जरूरी है।

एडवोकेट कमीशन के सर्वे में मंदिर के साक्ष्य
विष्णु जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट कमीशन को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में रिवीजन को कहा गया। साक्ष्य के लिए एडवोकेट कमीशन का आदेश हुआ। एडवोकेश कमीशन के सर्वे में मंदिर के साक्ष्य मिले। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत का आदेश सही है। कोर्ट ने पावर का यूज कर कमीशन भेजने का आदेश दिया। यह भी कहा कि एएसआई विशेषज्ञ की तरह है, पक्षकार बनाना जरूरी नहीं है।

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में वाद पोषणीय ही नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील नकवी ने कहा कि हलफनामे में फोटो लगा है। इसमें एएसआई अधिकारी के साथ सरकारी वर्दी वाले कपड़े में कोई कुदाल फावड़ा लेकर मौके पर गया। आशंका है इसका इस्तेमाल होगा। फावड़ा आदि की जरूरत नहीं थी। कह रहे हैं कि पांच फीसदी काम हुआ है। आशंका है कुछ कर सकते हैं जो बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा सकती है। नकवी ने यह भी कहा कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में वाद पोषणीय नहीं है।

मौके पर परिवर्तन प्रतिबंधित है। विशेषकर धार्मिक स्थलों की 15 अगस्त 1947 की स्थिति में बदलाव पर रोक है। 1947 से बिल्डिंग की यही स्थिति थी। हम कहते हैं छह सौ साल पुराना है और ये कहते हैं हजार साल पुराना। यानी इस भवन में बदलाव नहीं किया जा सकता। और एएसआई जांच साक्ष्य इकट्ठा करने की कोशिश है। थर्ड पार्टी वाद दाखिल कर साक्ष्य इकट्ठा करने की मांग कर रही। हमारी शंका इसलिए भी कि अर्जी में खुदाई की मांग है और अदालत के आदेश में भी खुदाई का जिक्र है।

सर्वे के लिए अप्लिकेशन प्री मेच्योर, पहले एविडेंस आए
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने कहा कि सर्वे के लिए अप्लिकेशन प्री मेच्योर है। पहले एविडेंस आ जाए फिर दी जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप सभी ने बहस की लेकिन अपलिकेशन क्या है और किस ग्राउंड पर दी गई, यह किसी ने नहीं बताया। कृप्या अपलिकेशन पढ़िए। इस पर हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन सर्वे के लिए लोअर कोर्ट में दी गई अर्जी पढ़ी। जैन ने कहा कि कोर्ट को कमीशन जारी करने का पावर है। स्थानीय कोर्ट विवेचना करा सकती है, विशेषज्ञ जांच का आदेश दे सकती है।

ज्ञानवापी परिसर के अंदर संस्कृत के श्लोक और पुराने शिवलिंग
हिन्दू पक्ष के वकील जैन ने कहा कि मुहम्मद गजनवी से लेकर अनेक आकांताओं कई बार मंदिरों को तोड़ा। आजादी के बाद सभी को पूजा अधिकार मिला। भवन पुराना हिंदू मंदिर है। जैन ने कहा कि सर्वे के आदेश में अदालत ने कहा है कि एएसआई के पास इंस्ट्रूमेंट है,जांच कर सकती है। विशेषज्ञ इंजीनियर इनके पास हैं। और राम मंदिर केस में ऐसा किया गया है। कहा कि ज्ञानवापी परिसर के अंदर संस्कृत के शलोक लिखे हैं, पुराने शिवलिंग हैं। इस संदर्भ में हमारी अर्जी के साथ उस परिसर की पश्चिमी दीवार की फोटो भी लगाई गई है। जैन ने यह भी कहा कि वैरिकेडिंग एरिया का हम सर्वे चाहते हैं।

बुधवार को हुई थी साढ़े चार घंटे सुनवाई
इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने दो चरणों में लगभग साढ़े चार घंटे तक चली सुनवाई पूरी न हो पाने के कारण गुरुवार के लिए मामले को टाल दिया था। कोर्ट ने सर्वे पर रोक बरकरार रखने का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष इंतजामिया कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फरमान नकवी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि मुस्लिम पक्ष ढांचे की खुदाई कराना चाहता है। इससे पुराना ढांचा गिर सकता है। इसके बाद कोर्ट ने वाराणसी से एएसआई अफसर को बुलाया और शाम साढ़े चार बजे दोबारा सुनवाई की थी।

एएसआई की ओर से एडिशनल डायरेक्टर जनरल आलोक त्रिपाठी उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि अब तक सर्वे का कितना काम पूरा हुआ है, इस पर उन्होंने बताया कि पांच प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कोर्ट ने जानना चाहा कि आप सर्वे का काम कब तक पूरा कर लेंगे। आलोक त्रिपाठी ने बताया कि 31 जुलाई तक सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कोर्ट को बारीकी से जीपीएस सर्वे की तकनीक के बारे में बताया था।

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