गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर भाजपा ने मंगलवार को अपना संकल्प पत्र जारी किया, जिसमें पार्टी ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का वादा किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा सत्ता में लौटती है, तो तीन महीने के भीतर यह कानून लागू कर दिया जाएगा।
सरमा ने कहा कि UCC लागू करते समय असम के मूल निवासियों, आदिवासी और जनजातीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के तहत संरक्षित क्षेत्रों जैसे Sixth Schedule और अन्य जनजातीय इलाकों को इससे बाहर रखा जाएगा।
भाजपा के घोषणापत्र में यह वादा सत्तारूढ़ पार्टी की छवि मजबूत करने और चुनावी मोर्चे पर मुद्दा बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि असम में UCC को लेकर चर्चा पिछले कुछ सालों में तेज हुई है, और अब इसे चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा ने अपने वोट बैंक को सक्रिय करने की कोशिश की है।
संकल्प पत्र में ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कड़े कानून लाने का वादा भी शामिल है, साथ ही अवैध कब्जाधारियों और घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही गई है। इसके अलावा, पार्टी ने अगले पांच साल में 2 लाख सरकारी नौकरियाँ देने, महिलाओं को प्रतिमाह ₹3,000 की सहायता देने और केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने का भी वादा किया है।
चुनावी माहौल में यह घोषणापत्र भाजपा के सुरक्षा और पहचान आधारित एजेंडे को मजबूत करता नजर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि असम में यह मुद्दा वोटरों के बीच कट्टरता और सुरक्षा की भावना को भड़काने का भी एक राजनीतिक उपकरण है।
असम में चुनावी सरगर्मी 9 अप्रैल से शुरू होगी और मतगणना 4 मई को होने की संभावना है। इस बीच भाजपा के इस घोषणापत्र को विपक्ष द्वारा सवालों और आलोचनाओं के तहत परखा जाएगा।













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