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Home राज्य-शहर पश्चिम बंगाल

बंगाल में ‘चेहरे’ नहीं, ‘टीम’ पर भरोसा—भाजपा की बदली चुनावी दिशा

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
March 20, 2026
in पश्चिम बंगाल, राजनीतिक
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भाजपा का ‘वोटर जोड़ो’ अभियान: युवाओं और प्रवासियों पर फोकस

डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पार्टी इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधे हमले करने से बचते हुए संगठित और संतुलित प्रचार पर जोर देने की तैयारी में है।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पिछले चुनाव में ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत और तीखे हमलों से उन्हें सहानुभूति मिली थी, जिसका राजनीतिक लाभ तृणमूल कांग्रेस को हुआ। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी ने अपने प्रचार की दिशा बदली है।

भाजपा इस चुनाव में अपने प्रमुख नेताओं को व्यापक स्तर पर मैदान में उतारने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई वरिष्ठ नेता राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रचार की कमान संभालेंगे। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी चुनिंदा क्षेत्रों में रैलियां करेंगे।

पार्टी लगभग 50 वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपने की योजना बना रही है, जिससे पूरे राज्य में एकसमान और समन्वित प्रचार सुनिश्चित किया जा सके।

इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव अपेक्षाकृत कम चरणों में संपन्न होने की संभावना है, जो भाजपा के लिए अनुकूल माना जा रहा है। पार्टी का आकलन है कि लंबे और बहु-चरणीय चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती रही है, जबकि सीमित चरणों में मतदान से संगठनात्मक मजबूती का लाभ मिल सकता है।

भाजपा की रणनीति का एक अहम पहलू यह भी है कि चुनाव को “ममता बनर्जी बनाम भाजपा” की सीधी लड़ाई बनने से रोका जाए। इसके लिए पार्टी ने अपने नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे ममता बनर्जी का नाम लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचें और “दीदी” जैसे संबोधनों का सीमित उपयोग करें। इसके बजाय स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और संगठनात्मक ताकत को प्रचार का केंद्र बनाया जाएगा।

इसके साथ ही भाजपा तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधने और नए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की यह “संयमित और रणनीतिक” चुनावी नीति पिछले अनुभवों से निकली एक व्यावहारिक पहल है। अब देखना यह होगा कि यह बदली हुई रणनीति पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को कितना प्रभावित करती है।

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