डेस्क : भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए नई पहलों पर सहमति जताई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूएई की विदेश राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के बीच पिछले उच्चस्तरीय दौरों और समझौतों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, द्विपक्षीय सहयोग को नए क्षेत्रों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया गया।भारत-यूएई साझेदारी को नई उड़ान, रणनीतिक सहयोग और गहरा होगा
वार्ता के दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति तथा लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने यह माना कि भारत-यूएई संबंध केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
विदेश सचिव ने यूएई के वरिष्ठ अधिकारियों और निवेश क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, उभरती तकनीकों और बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और यूएई के संबंधों में तेजी से विस्तार हुआ है। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूएई भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों और निवेशकों में शामिल हो चुका है।
क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करते हुए दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और यूएई ने आपसी सहयोग को भविष्य में और अधिक व्यापक एवं रणनीतिक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।













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