डेस्क : ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वर्ष २०१० में ब्राज़ील, तुर्किये और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते की प्रति सौंपी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के संबंध पुनः तनावपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद लूला दा सिल्वा ने पत्रकारों से कहा कि विश्व को युद्ध नहीं, संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया कि ईरान के साथ टकराव की नीति छोड़कर वार्ता और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
लूला दा सिल्वा ने बताया कि उन्होंने ट्रंप को वर्ष २०१० के उस समझौते की जानकारी दी, जिसके अंतर्गत ईरान अपने कम संवर्धित यूरेनियम को तुर्किये भेजने पर सहमत हुआ था। इसके बदले उसे अनुसंधान रिएक्टर के लिए परमाणु ईंधन उपलब्ध कराया जाना था। उस समय इस पहल को पश्चिम एशिया में परमाणु संकट कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया था।
ब्राज़ीलियाई राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उस समझौते को बाद में अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल सका। उनके अनुसार, यदि उस समय वैश्विक शक्तियाँ इस पहल को गंभीरता से लेतीं, तो आज की परिस्थितियाँ भिन्न हो सकती थीं।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने लूला दा सिल्वा द्वारा सौंपे गए दस्तावेज़ को स्वीकार करते हुए कहा कि वह इसका अध्ययन करेंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
करीब तीन घंटे चली इस बैठक में व्यापार, वैश्विक सुरक्षा, आयात शुल्क तथा अंतरराष्ट्रीय अपराध जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि लूला दा सिल्वा का यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की नई संभावना तलाशने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।













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