डेस्क : बिहार की सियासत इन दिनों एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे बिहार का “सबसे बड़ा अपहरण” करार दिया है और भाजपा पर तीखा व्यंग्य किया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर पोस्ट किया कि भाजपा ने राजनीतिक निर्णय को एक तरह के “आर्थिक अपहरण” में बदल दिया है और इस अपहरण की फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया है। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।
विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ
सपा प्रमुख ने JDU कार्यालय में नाराज कार्यकर्ताओं द्वारा की गई तोड़फोड़ और विरोध को भी अपनी पोस्ट में दिखाया। इसके अलावा, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “हाइजैक” कर लिया है और यह कदम राज्य में सत्ता संतुलन को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने भी आरोप लगाया कि भाजपा ने JDU पर कब्ज़ा कर लिया है और इस रणनीति का असर आने वाले समय में बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों पर स्पष्ट दिखाई देगा।
सियासी पृष्ठभूमि
नीतीश कुमार ने अपने घोषणा में कहा है कि वे विधान सभा और विधान परिषद दोनों सदनों के सदस्य बनना चाहते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। इस कदम के बाद भाजपा और JDU के बीच सत्ता साझा करने और भविष्य की रणनीति को लेकर सियासी चर्चाएँ तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस घोषणा का असर बिहार की राजनीति में लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। विपक्ष इसे भाजपा का सत्ता कब्ज़ा रणनीति मान रहा है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक बदलाव का एक हिस्सा बता रही है।
बिहार की सियासत फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक चतुराई के बीच बहती नजर आ रही है, और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने की संभावना है।













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