Moradabad News: मुरादाबाद में तेंदुओं के बढ़ते आतंक के बीच शनिवार सुबह 12 वर्षीय बालक लोकेंद्र ने अदम्य साहस की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। घास काटने गए लोकेंद्र पर पहले से घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया, लेकिन बच्चा घबराने के बजाय उससे भिड़ गया। हाथ में मौजूद दरांती से उसने तेंदुए का मुकाबला किया और शोर मचाते हुए खुद को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। घायल बालक को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
घटना कांठ क्षेत्र के ग्राम मुजफ्फरपुर टांडा की है। गांव निवासी लोकेंद्र कुमार पुत्र मुनेशपाल शनिवार को अपने चचेरे भाई विकास समेत अन्य बच्चों के साथ गांव से करीब दो किलोमीटर दूर नाले के पार घास काटने गया था। उसके साथी नाले के इस पार खड़े थे, जबकि लोकेंद्र अकेले आगे बढ़कर घास काट रहा था। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे बैठे तेंदुए ने अचानक उस पर झपट्टा मार दिया।
अचानक हुए हमले से सहमा लड़का
अचानक हुए हमले से कुछ पल के लिए लोकेंद्र सहम जरूर गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। तेंदुए के पंजों और जबड़ों से खुद को बचाने के लिए उसने हाथ में मौजूद दरांती से वार करना शुरू कर दिया। बालक के शोर मचाने पर आसपास मौजूद बच्चे और ग्रामीण मौके की ओर दौड़े। लोगों की आहट और विरोध का सामना होते ही तेंदुआ लोकेंद्र को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक लोकेंद्र गंभीर रूप से घायल हो चुका था। खून से लथपथ हालत में उसे गांव लाया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। हर कोई बालक की बहादुरी की चर्चा करता नजर आया। सूचना पर पहुंची एंबुलेंस से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
गांव में चर्चा का विषय बनी बहादुरी
कांठ। खून से लथपथ लोकेंद्र जब गांव पहुंचा, तो उसकी आपबीती सुन हर कोई दंग रह गया। ग्रामीणों ने उसकी सूझबूझ और जांबाजी की जमकर सराहना की। उसे तत्काल एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल मुरादाबाद रेफर कर दिया है।
दो महीने में 9 लोग हुए शिकार, दहशत में ग्रामीण
कांठ क्षेत्र में वन्यजीवों का आतंक अब बेकाबू होता जा रहा है। पिछले दो माह के भीतर मिश्रीपुर, राजीपुर खादर, फत्तेहपुर बिश्नोई और सलेमपुर जैसे गांवों में तेंदुआ सात बच्चों समेत 9 लोगों को शिकार बना चुका है। डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह ने टीम के साथ मौके पर कांबिंग तो की, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी रोष है। वन विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से तेंदुए मैदानी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे खतरा बढ़ गया है।













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