डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर दुनिया भर में बढ़ते निवेश और बाजार के उत्साह के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका मानना है कि एआई तकनीक निश्चित रूप से भविष्य की अर्थव्यवस्था और कामकाज के स्वरूप को बदलने की क्षमता रखती है, लेकिन इसके आर्थिक लाभों को लेकर बाजार की अपेक्षाएं वास्तविकता से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ रही हैं।
रघुराम राजन ने कहा कि वर्तमान समय में एआई क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर, चिप निर्माण और कंप्यूटिंग अवसंरचना पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में होने वाली आय और मुनाफा इन विशाल निवेशों को किस हद तक उचित ठहरा पाएंगे।
उन्होंने कहा कि एआई की मांग वास्तविक है और इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन निवेशकों द्वारा जिस प्रकार के असाधारण लाभ की उम्मीद की जा रही है, वह कई जोखिमों को नजरअंदाज करती दिखाई देती है। राजन के अनुसार, एआई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है और अभी तक कोई भी कंपनी ऐसी निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सकी है, जो उसे लंबे समय तक बाजार पर एकाधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाए।
पूर्व आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में एआई उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें ऊर्जा की बढ़ती खपत, उन्नत चिप्स की उपलब्धता, डेटा सुरक्षा, साइबर जोखिम और संभावित सरकारी नियमन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उनका मानना है कि यदि सरकारें एआई के दुरुपयोग, डीपफेक, गोपनीयता और सामाजिक प्रभावों को लेकर कड़े नियम लागू करती हैं, तो उद्योग की विकास गति प्रभावित हो सकती है।
रोजगार के मोर्चे पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। राजन का कहना है कि यदि एआई के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियों पर असर पड़ता है, तो इससे सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में सरकारों को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, जिसका प्रभाव उद्योग और निवेश दोनों पर दिखाई देगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तकनीकी इतिहास में कई बार नई तकनीकों को लेकर अत्यधिक उत्साह देखा गया है, लेकिन हर निवेशक या कंपनी अंततः सफल नहीं हो पाती। एआई भी एक परिवर्तनकारी तकनीक साबित हो सकती है, परंतु इससे जुड़े सभी कारोबारी मॉडल लाभदायक होंगे, यह मान लेना जल्दबाजी होगी।
रघुराम राजन ने कहा कि एआई का भविष्य उज्ज्वल है और यह उत्पादकता बढ़ाने के साथ कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन निवेशकों और नीति निर्माताओं को उत्साह के साथ-साथ जोखिमों का भी संतुलित आकलन करना चाहिए।













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