डेस्क : भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। थलसेना के निवर्तमान प्रमुख ने अपने हालिया बयान में खुलासा किया है कि सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रतिदिन औसतन तीन बार आमना-सामना होता है। उन्होंने इसे सीमावर्ती क्षेत्र की “जटिल और संवेदनशील वास्तविकता” बताया है।
थलसेना प्रमुख के अनुसार, एलएसी पर स्थिति भले ही नियंत्रण में रखी जा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी मौजूद है और दोनों पक्षों की गश्त कई बार एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाती है। इसी कारण छोटी-छोटी टकराव जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें तकनीक, सूचना युद्ध, साइबर क्षमता और तेज़ प्रतिक्रिया प्रणाली की अहम भूमिका होगी। उनके अनुसार, आधुनिक संघर्षों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सेना को उसी अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
थलसेना प्रमुख ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति को स्थिर बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और सैन्य-स्तरीय तंत्र आवश्यक हैं, ताकि किसी भी अनचाही टकराव की स्थिति से बचा जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सीमा पर जमीनी विश्वास की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच 2020 के बाद से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और कई क्षेत्रों में गश्त एवं उपस्थिति को लेकर लगातार सावधानी बरती जा रही है।













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