डेस्क:कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने बयानों को लेकर हाल के दिनों सुर्खियों में हैं। एकबार फिर उन्होंने अपने बयान से सियासी माहौल गरमा दिया है। उन्होंने रविवार को बारिश से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद अजमेर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राजस्थान का नेतृत्व करने के लिए वसुंधरा राजे भाजपा की ‘स्वाभाविक पसंद’ होनी चाहिए थीं।
दरअसल, पत्रकारों ने अशोक गहलोत से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से जोधपुर में हुई मुलाकात के बारे में पूछा गया। अगर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री के रूप में लौटतीं तो उन्हें दोबारा उस भूमिका में देखना सुखद होता। दुर्भाग्य से उनकी अपनी पार्टी उन्हें यह मौका नहीं दे रही है, जो निराशाजनक है।
अशोक गहलोत ने आगे कहा कि एक अनुभवी नेता होने के बावजूद वसुंधरा राजे को अलग-थलग कर दिया गया है। उन्हें मौका क्यों नहीं मिल रहा है? बीजेपी की स्वाभाविक पसंद वसुंधरा होनी चाहिए थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समय दिया गया था, लेकिन दो साल बीत चुके हैं। हम चुप नहीं रह सकते हैं।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के जोधपुर दौरे पर अशोक गहलोत ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भागवत ने जोधपुर को चुना। उम्मीद है कि इस शहर से प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश जाएगा। हालांकि, कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने काशी और मथुरा को लेकर चल रही चर्चा की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि ऐसे मुद्दे सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं।
गहलोत के वसुंधरा पर दिए बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है। BJP प्रवक्ता लक्ष्मीनकांत भारद्वाज ने कहा कि गहलोत अपनी ही पार्टी के अंदर की चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में बेहतरीन काम हो रहा है, जिससे गहलोत बेचैन हो रहे हैं। गहलोत को याद रखना चाहिए कि जनता उनको खारिज कर चुकी है।













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