डेस्क : कश्मीर घाटी और लद्दाख को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित ज़ोजिला टनल अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। हिमालय की लगभग 11,500 फीट ऊँचाई पर बन रही यह 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग भारत की सबसे महत्वाकांक्षी और रणनीतिक सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
ताज़ा जानकारी के अनुसार इस टनल की खुदाई लगभग पूरी हो चुकी है और आने वाले समय में “ब्रेकथ्रू ब्लास्ट” के साथ दोनों छोरों को जोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। इसके बाद निर्माण कार्य के अंतिम तकनीकी चरण शुरू होंगे।
सालभर खुला रहेगा लद्दाख का रास्ता
अब तक ज़ोजिला दर्रा भारी बर्फबारी के कारण हर साल कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट जाता है। टनल बनने के बाद यह बाधा खत्म हो जाएगी और श्रीनगर से लेह-कारगिल तक पूरे साल आवाजाही संभव हो सकेगी।
यात्रा समय भी काफी कम होगा। जहां अभी इस कठिन पहाड़ी रास्ते को पार करने में कई घंटे लगते हैं, वहीं टनल के माध्यम से यह दूरी लगभग 15 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी।
सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण परियोजना
ज़ोजिला टनल को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम योजना माना जा रहा है। लद्दाख क्षेत्र चीन और पाकिस्तान सीमा के बेहद संवेदनशील इलाके में स्थित है।
सर्दियों में दर्रा बंद होने पर सेना को रसद, उपकरण और आपूर्ति पहुँचाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस टनल के चालू होने के बाद सेना की आवाजाही और लॉजिस्टिक सप्लाई पूरे वर्ष निर्बाध रूप से जारी रह सकेगी।
अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से कश्मीर और लद्दाख दोनों क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि की उम्मीद है। बर्फबारी के कारण जो इलाके महीनों तक अलग-थलग रहते थे, वे अब पूरे साल देश के मुख्यधारा से जुड़े रहेंगे।
स्थानीय लोगों के लिए यह परियोजना स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को भी आसान बनाएगी।
कठिन परिस्थितियों में निर्माण
हिमालयी क्षेत्र की कठोर भू-भौगोलिक परिस्थितियों, लगातार बर्फबारी और भूस्खलन के जोखिम के बीच इस टनल का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। परियोजना का निर्माण दोनों दिशाओं से समानांतर रूप से किया गया है ताकि समय और जोखिम दोनों को नियंत्रित किया जा सके।
यह परियोजना भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी दक्षता का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।













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