पूछताछ के दौरान मंगलवार को तीन बार पूजा सिंघल ने तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद डॉक्टरों की टीम को बुलानी पड़ी। डॉक्टरों ने पूजा सिंघल को स्वस्थ बताया है, लेकिन बीपी बढ़ने-घटने की बात जांच में आयी।
प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयी
हाईकोर्ट में शेल कंपनियों के मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि इस मामले में खनन सचिव निलंबित हुई हैं तो उन पर प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई है। क्या कोर्ट ने इस तरह के एफआईआर करने पर कोई रोक लगाई है?
सचिव इस मामले में संदिग्ध हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जब इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है तो किस आधार पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है अदालत
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी के अधिवक्ता से पूछा कि जब मनरेगा घोटाले में आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है, तो इसकी सीबीआई जांच के आदेश कैसे दिया जा सकता है। इस पर प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर अदालत जांच के आदेश दे सकती है। यह मामला मनरेगा घोटाले के आरोपी रह चुकी तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल से जुड़ा है और शेल कंपनियों की बात सामने आ गयी है। ऐसे में अदालत सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है।
रांची के उपायुक्त से कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा
सीएम हेमंत सोरेन के नाम पर लीज आवंटन मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने रांची के उपायुक्त की ओर से दाखिल शपथ पत्र पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि आखिर उन्हें खनन विभाग के बारे में जानकारी कैसे है। अदालत ने कहा कि जब इस मामले में मुख्य सचिव सहित अन्य सचिवों को प्रतिवादी बनाया गया है, तो रांची उपायुक्त ने कैसे शपथ पत्र दाखिल कर दिया। इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि लघु खनिज आवंटन मामले में उपायुक्त ही प्राधिकार होते हैं। इसलिए उनकी ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया गया है। अदालत ने कहा कि उपायुक्त को खनन विभाग के बारे में सारी जानकारी कैसे हैं। उन्हें इसका जवाब कोर्ट में पेश करना चाहिए।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
