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Home देश

इसरो ने PROBA-3 को किया सफलतापूर्वक लॉन्च

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
December 6, 2024
in देश, मुख्य समाचार
Reading Time: 1 min read
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इसरो

File Photo

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के उपग्रह PROBA-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह प्रक्षेपण इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के जरिए ‘C-59’ मिशन के तहत किया गया। यह इसरो का 61वां वाणिज्यिक मिशन है।

PROBA-3 के बारे में जानिए:

  • PROBA-3 क्या है?
    PROBA का मतलब है ‘प्रोजेक्ट फॉर ऑनबोर्ड एनाटॉमी’। यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का एक विशेष अंतरिक्ष कार्यक्रम है। PROBA-3 इस श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है।
  • PROBA-3 का उद्देश्य:
    PROBA-3 एक सौर मिशन है जिसका उद्देश्य सूर्य की कोरोना (Corona) का अभूतपूर्व सटीकता के साथ अध्ययन करना है।
  • मिशन की संरचना:
    इस मिशन में दो स्वतंत्र उपग्रह शामिल हैं:

    1. कोरोनोग्राफ स्पेसक्राफ्ट (CSC): वजन 310 किलोग्राम।
    2. ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट (OSC): वजन 240 किलोग्राम।
      दोनों उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर 60,500 किमी तक की अंडाकार कक्षा में परिक्रमा करेंगे।
  • विशेष तकनीक:
    मिशन के तहत दोनों उपग्रह ‘फॉर्मेशन फ्लाइंग’ तकनीक का प्रदर्शन करेंगे। वे 150 मीटर की दूरी पर एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर उड़ान भरेंगे।
  • कोरोना की जांच:
    ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट सूर्य की सीधी रोशनी को CSC पर गिरने से रोकेगा, जिससे कोरोनोग्राफ स्पेसक्राफ्ट सूर्य की कोरोना को अल्ट्रावायलेट (UV), इन्फ्रारेड (IR) और दृश्यमान प्रकाश में सटीक रूप से मैप कर सकेगा।
  • मिशन के वैज्ञानिक उद्देश्य:
    PROBA-3 सूर्य की कोरोना का 1.1 सौर त्रिज्या पर निरीक्षण करेगा। यह इतनी सटीकता से सूर्य की कोरोना की मैपिंग करने वाला पहला उपग्रह है।
  • स्पेस में प्रयोगशाला:
    ESA ने PROBA-3 को अंतरिक्ष में एक ‘लैबोरेटरी’ बताया है। इसमें विभिन्न गाइडेंस, नेविगेशन और नियंत्रण प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। यह तकनीक भविष्य में मंगल ग्रह से सैंपल वापस लाने और निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) से उपग्रहों को हटाने में उपयोगी हो सकती है।
  • अगले कदम:
    लॉन्च के बाद दोनों उपग्रहों के बीच टकराव से बचने के लिए कुछ परीक्षण किए जाएंगे। फिर इन्हें सुरक्षित कक्षा में समन्वयित किया जाएगा। मिशन की हर परिक्रमा में यह विभिन्न परीक्षणों और कोरोना की गहन जांच करेगा।

इसरो और ESA का यह संयुक्त मिशन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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