डेस्क:लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मुद्दों को पूरी तरह समझने और उनका समाधान करने में विफल रही, जिससे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को “मौका” मिल गया। तेलंगाना के इंदिरा भवन में आयोजित कांग्रेस सांसदों और प्रदेश नेतृत्व की बैठक में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं एक व्यक्तिगत बात कहना चाहता हूं, जिससे लोग सहमत न भी हों। जब बात दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों की आई, तो कांग्रेस पार्टी ट्रैक पर थी। लेकिन बीते 10-15 वर्षों में ओबीसी वर्ग को लेकर हमारी समझ और हमारी प्रतिक्रिया वैसी नहीं रही जैसी होनी चाहिए थी। हमने उस जगह को खाली छोड़ा और बीजेपी ने उसमें जगह बना ली।” उन्होंने कहा कि पार्टी को अब सभी समुदायों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए ताकि “न्याय” और “समावेशिता” का स्पष्ट संदेश जाए।
गांधी ने कहा कि हर भारतीय का ध्यान रखना कांग्रेस का काम है और यह भी सच है कि कांग्रेस देश के सभी समुदायों के प्रति निष्पक्ष भाव रखने वाली पार्टी रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “…मुझे लगता है कि हमने भाजपा के लिए जगह बनाई, क्योंकि हम ओबीसी लोगों की आकांक्षाओं और इच्छाओं के प्रति संवेदनशील नहीं थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सभी को यह महसूस होना चाहिए कि पार्टी में निष्पक्षता है।’’
बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य में किए गए 2024 के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जातिगत सर्वेक्षण की प्रस्तुति दी। राहुल गांधी ने तेलंगाना जातिगत सर्वेक्षण को “देश में सामाजिक न्याय के लिए एक मील का पत्थर” बताया और कहा कि चाहे बीजेपी इसे पसंद करे या नहीं, पूरे देश में ऐसा ही राष्ट्रीय जातिगत जनगणना मॉडल अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण की पहल की, तब उनके मन में यह बात थी कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जिस समुदाय से आते हैं, वहां इसे लेकर कुछ विरोध हो सकता है। बावजूद इसके, यह सर्वेक्षण एक ऐतिहासिक कदम है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस संसद में इस “तेलंगाना मॉडल” को जातिगत जनगणना के लिए आगे बढ़ाएगी और केंद्र सरकार से भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग करेगी।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि यह जनगणना नौकरशाही के बंद कमरों में नहीं की गई, बल्कि दरवाजा खोला गया और तेलंगाना के लाखों लोगों, विभिन्न समुदायों और व्यावसायिक समूहों की भागीदारी के साथ सर्वेक्षण किया गया। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया, “हम जाति, शिक्षा, स्वास्थ्य या किसी भी चीज को लक्षित कर सकते हैं। आज भारत के किसी भी अन्य राज्य में तेलंगाना की तरह विकास को लक्ष्य में रखकर काम करने की क्षमता नहीं है। यह एक सामाजिक औजार है, यह एक वित्तीय और आर्थिक साधन भी है। भाजपा को यह पसंद नहीं है कि यह एक राजनीतिक साधन भी है।” उन्होंने कहा, “आरक्षण पर 50 प्रतिशत की दीवार तोड़ने का विचार, जिसका भाजपा सरकार विरोध कर रही है, हिंदुत्व की राजनीति को पूरी तरह से नष्ट करने की क्षमता रखता है।’’
गांधी ने कहा कि जब कांग्रेस दबाव डालती है, तो भाजपा को सुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने दावा किया, “मुझे पता है कि भाजपा जाति जनगणना सही तरीके से नहीं करने जा रही है। वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे भारत के लोगों को ओबीसी, दलितों और आदिवासियों, यहां तक कि सामान्य जातियों की वास्तविक स्थिति नहीं बता सकते। क्योंकि, अगर वे भारत को सच बता देंगे, तो उनका पूरा विचार ही खत्म हो जाएगा।”
गांधी ने अंग्रेजी भाषा की शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और दावा किया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार जाति जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके तेलंगाना के लोगों के जीवन को बदलने में मदद करेगी। खरगे ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और कहा कि उन्हें खुशी है कि तेलंगाना ने एक अच्छा काम किया है और देश को नयी दिशा दिखाई है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि इस सर्वेक्षण में अछूतों को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इस दिशा में काम करने का आग्रह करते हुए कहा, “अगर अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर कांग्रेस का समर्थन करते हैं, तो हम 50 प्रतिशत से ज़्यादा (वोट) हासिल कर सकते हैं और लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं।”
खरगे ने कहा, “हमें हर राज्य में ताकत के साथ ऐसा करना होगा। हमें निडर होकर काम करना होगा। हमें अपनी पार्टी को मजबूत करना होगा और यह राजनीतिक सत्ता मिलने पर ही हासिल हो सकता है। हम समाज को तभी आगे ले जा सकते हैं जब हमारे पास आर्थिक, मानसिक या मानवीय शक्ति हो।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों और अन्य नेताओं से तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण को अन्य राज्यों में भी ले जाने का आग्रह किया।













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