स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने अपनी सफलता के पीछे परिवार के संघर्ष और त्याग की मार्मिक कहानी साझा करते हुए कहा है कि उनकी मां ने क्रिकेट का सपना पूरा करने के लिए अपने गहने तक बेच दिए थे। 22 वर्षीय गेंदबाज का कहना है कि वह अपने प्रदर्शन से परिवार के उस त्याग का सम्मान करना चाहती हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचीं क्रांति गौड़ आज महिला क्रिकेट की उभरती हुई सितारों में गिनी जाती हैं। हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी, सामाजिक ताने और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
क्रांति ने कहा कि उनके परिवार ने हर कठिन परिस्थिति में उनका साथ दिया। उन्होंने याद करते हुए बताया कि क्रिकेट खेलने के लिए उन्हें लगातार यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। ऐसे समय में उनकी मां ने उनके लिए एक अच्छी क्रिकेट किट खरीदने हेतु अपने गहने बेच दिए। यह त्याग उन्हें आज भी प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि परिवार के समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। जब लोग लड़कियों के खेलों में करियर बनाने पर सवाल उठाते थे, तब उनके माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। यही विश्वास उन्हें भारतीय टीम तक लेकर आया।
क्रांति गौड़ ने कहा कि अब उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपने प्रदर्शन से परिवार को गर्व महसूस कराना है। उन्होंने कहा कि जब परिवार इतना बड़ा त्याग करता है तो खिलाड़ी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। वह चाहती हैं कि उनकी उपलब्धियां उनके माता-पिता के संघर्ष को सार्थक साबित करें।
क्रांति की सफलता का असर उनके गांव में भी दिखाई दे रहा है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद वहां क्रिकेट अकादमी शुरू हुई है और अब बड़ी संख्या में लड़कियां क्रिकेट सीखने के लिए आगे आ रही हैं। कई परिवार, जो पहले बेटियों को खेलों में भेजने से हिचकते थे, अब उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं।
महिला टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं क्रांति का कहना है कि वह हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती हैं और देश के लिए विश्व कप जीतकर अपने परिवार के त्याग का ऋण चुकाना चाहती हैं।













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